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मंगलवार, 5 जून 2018

पेड़ों को बचाने के लिए 30 साल पहले किया कुल्हाड़ी का त्याग

पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार और कई संस्थाएं प्रयास करती रहती है. हर साल इस धरती पर लाखों पेड़ लगाएं जाते हैं, लेकिन इन पेड़ों को लगाकर ही इतिश्री कर ली जाती है. इन सबके बीच प्रदेश की शिक्षा नगरी कोटा का एक गांव हैं जहां पेड़ ना सिर्फ लगाए जाते हैं, बल्कि उन्हें बच्चों की तरह पाले जाते हैं. कोटा जिले का बौराबास गांव आज हरा-भरा और वन संपदा से संपन्न गांव है. इस गांव के बुजूर्गों ने करीब 30 साल पहले घटते जंगलों को बचाने की मुहिम चलाई थी वो आज तक कायम है. ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ों को बचाने के लिए गांव के लोगों ने कुल्हाड़ी का त्याग कर दिया था. इसके लिए गांव के लोगों ने चौपाल लगाकर यह भी तय किया था कि जो कोई इस संकल्प को तोड़ेगा उसे बतौर सजा एक अनाज की बोरी पक्षियों के लिए देनी होगी. इसी का नतीजा है कि पथरीले जंगल में हरे भरे पेड़ इस गांव के लोगों के संकल्प की न सिर्फ गवाही दे हैं बल्कि इनकी उस शिद्दत को भी बता रहे हैं जो उन्होंने इतने सालों के गुजर जाने के बखूबी निभाई है.

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